Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी शाखा महाराष्ट्र का प्रथम अधिवेशन - वक्तव्य


आदरणीय अध्यक्ष महोदय एवं कुलपति काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी डॉक्टर संभाजी राजा राम बावेस्कर जी मंच पर विराजमान विद्वतगण  और हमारे सामने उपस्थित महाराष्ट्र की  तपोभूमि से आए हुए समस्त विद्वान भाइयों एवं बहनों सभी का बाबा भोलेनाथ और भगवान राम की नगरी से मेरे होने के कारण आप सभी का इस प्रांगण में अभिनंदन एवं स्वागत है। 
महाराष्ट्र की इस तपोवन पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया और साथ ही साथ उन्होंने शिक्षा सामाजिक सुधार ब्रिटिश साम्राज्य को अपनी भूमि से भागने का काम किया और दलितों के बीचों की शिक्षा में सुधार और समाज सुधार का काम किया। 
इन महापुरुषों में से कुछ एक का नाम यहाँ जिक्र करना उचित समझाऊंगा जैसे महात्मा फुले, महात्मा गांधी, सावित्रीबाई फुले, ओशो, नाना फडणवीस एवं डॉ भीमराव अंबेडकर आदि। 
पुणे महाराष्ट्र का नाम जहां लिया जाता है वहां शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य का इतिहास  लोगों के दिलों दिमाग पर छा जाता है शिवाजी महाराज ने सन 1749 में पुणे को मराठा साम्राज्य की राजधानी बनाया था। 
     महारानी ताराबाई- जिन्होंने मुगलों के खिलाफ युद्ध   ‌‌‌‌           लड़ी  थी। 
     बाजीराव पेशवा- एक शक्तिशाली पेशवा थे जिन्होंने           मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ाई लड़ी। 
      बाल गंगाधर तिलक- यह एक राष्ट्रवादी नेता थे                जिन्होंने   केसरी अखबार की स्थापना की और अंग्रेजों         के खिलाफ युद्ध का बिल्कुल फूंका। 
     विनायक दामोदर सावरकर- एक शक्तिशाली योद्धा के        रूप में इन्होंने स्वतंत्र समर नामक एक पुस्तक लिखी            और   स्वतंत्रता के लिए समर्पित रहे। 
     पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर- पलुस्कर जी एक प्रसिद्ध       संगीतकार और गायक थे। अपने संगीत के क्षेत्र में              गांधर्व महाविद्यालय की स्थापना की और भारतीय              संगीत संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया। 
       महारानी ताराबाई- महारानी को डेक्कन की एक               शक्तिशाली रानी के रूप में जाना जाता है मराठा                  साम्राज्य के विस्तार और रक्षा के लिए अपने महत्वपूर्ण        भूमिका निभाई थीं। 
इतिहास की तरह में जाने के पहले हमें यह देखना होगा कि हम काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी के लिए जो सदस्यता ग्रहण की है इसका उद्देश्य हिंदी को बढ़ावा देना और संपूर्ण विश्व में इसका प्रसार प्रचार करना हमारा उद्देश्य होना चाहिए क्योंकि यही एक भाषा है जिसमें मिठास है और इसकी मान्यता हमें 'राजभाषा' के रूप में अभी मिली हुई है इसे राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करना हमारा आपका कर्तव्य है। मैं उम्मीद है आप सभी लोग अपने स्तर से इसके प्रचार प्रसार के लिए आज से ही लग जाएंगे। 

वर्तमान समय में हिंदी के विकास के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं:

*शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा:*
- हिंदी को शिक्षा के माध्यम के रूप में बढ़ावा देना।
- हिंदी में शिक्षा सामग्री का विकास करना।
- हिंदी भाषा के शिक्षकों को प्रशिक्षित करना।

*साहित्य और संस्कृति में हिंदी को बढ़ावा:*
- हिंदी साहित्य को बढ़ावा देना।
- हिंदी संस्कृति को बढ़ावा देना।
- हिंदी भाषा में लिखने वाले लेखकों और कवियों को प्रोत्साहित करना।

*तकनीक में हिंदी को बढ़ावा:*
- हिंदी में तकनीकी शब्दावली का विकास करना।
- हिंदी में सॉफ्टवेयर और ऐप्स का विकास करना।
- हिंदी में इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग करना।

*सरकारी स्तर पर हिंदी को बढ़ावा:*
- हिंदी को सरकारी कार्यों में बढ़ावा देना।
- हिंदी में सरकारी दस्तावेजों और नीतियों का विकास करना।
- हिंदी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाएं बनाना।

*समाज में हिंदी को बढ़ावा:*
- हिंदी को समाज में बढ़ावा देना।
- हिंदी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समाजिक कार्यक्रम आयोजित करना।
- हिंदी में सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना।
एक बार पुनः पुणे, महाराष्ट्र की इस पावन धरा पर आप सभी विद्वानों का काशी हिंदी विद्यापीठ की तरफ से हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करते हैं। 

- सुख मंगल सिंह
कुलाधिपति
काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी

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