Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

दोस्त

 
अगर आंसू कभी आये, तो आंसू पौंछ देता है,
मेरी खुशियों पर अपना, सभी कुछ वार देता है।
मेरे ग़म में तड़पता जो, भुला खुद के गम सारे,
खुशी मिल न सकी अपनों से, दोस्त वार देता है।

अ कीर्ति वर्द्धन

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