माँ तुझको सौ बार नमन है ।
तूने जन्म दिया जो मुझको,
धन्यवाद कैसे दूँ तुझको ?
जो तुझ सी देवी हो घर में
निश्चय ही घर देवभवन है ।
माँ तुझको ..
अजब सहनशक्ति है तेरी,
सदा ग़लतियाँ बख़्शीं मेरी,
मेरे लिए हमेशा तूने
इच्छाओं का किया दमन है ।
माँ तुझको ..
मेरी आँखें पढ़ लेती तू,
सारे झूठ पकड़ लेती तू,
छाती से चिपटा सहलाया,
जब भी मैंने किया रुदन है ।
माँ तुझको .
'अंक' न माँ को पीड़ा दीजे,
इससे कभी न धोखा कीजे,
इसके शीतल उर में बसती-
संघर्षों की तीव्र तपन है ।
माँ तुझको ..
—अंकित गुप्ता 'अंक'
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