Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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गरीबी दुष्चक्र

 

प्रति छन प्रत्यक जगह एक से हालात नहीं होते
जब कुछ लोग चैन से होते हे
तो कहीं होती हे
दिल दहला देने वाली चीत्कारें
कहीं उम्मीद दूर रही होती हे
और कहीं भ्रस्टाचार की साड़ी सीमाए
चमचमाती भारतीय अर्थव्यवस्था को जब
ओबामा भी सलाम कर रहा हे,तब
भी गरीब व्यक्ति रोटी व छत के अभाव में
गर्मी
सर्दी
बरसात
जेसे प्राकृतिक आपदाव
में शहीद होकर पुलिश का नया केश
मीडिया की ब्रेअकिंग न्यूज़
नेताजी के लिए नया मुद्दा
बनकर
सबकी नय्या पार लगता रहा हे
परन्तु स्वयम गरीबी के दुश्चक्र
के कारन व परिणाम
'गरीबी' के फेर में
पिसता रहा हे.

 

Ankita Panwar

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