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Dr. Srimati Tara Singh
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लक्ष्य बनाएं – जीवन संवारें

 

 

वर्तमान युग प्रतिस्पर्धा का युग है, सभी में एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ लगी हुई है। और यह भी उतना ही सत्य है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सफल होने के सपने देखता है और अपने आत्म-विश्वास, दृढ़-संकल्प, समर्पण, ईमानदारी और अनुशासन के बलबूते पर काफी हद तक अपने प्रयत्नों से उन सपनों को साकार करने में सफल भी रहता है। मेरे विचार से सफल बनने के लिए यदि हम कुछ नियमों व मूल-मंत्रों को अपनाएं तो निश्चय ही सफलता की सीढ़ियों को चढ़ना बेहद आसान हो जाएगा।
सही लक्ष्यों का निर्धारण:
सफल मनुष्य वही कहलाता है जिसका लक्ष्य एक हो और वह हमेशा उसकी पूर्ति में लगा रहे। लेकिन कोई भी लक्ष्य या ध्येय बनाने से पहले अपनी क्षमताओं का भी आकलन कर लें। तदोपरान्त दृढ़-प्रतिज्ञ होकर आगे बढ़ें। प्रसिद्ध वैज्ञानिक थामस अल्वा एडिसन, बिजली के बल्व के निर्माण में सौ बार नहीं बल्कि हजारों बार असफल रहे लेकिन उनके प्रयासों की निरन्तरता के चलते आज संसार अपने अंधकार को दूर करने में सक्षम हुआ है।
ईमानदारी अपनाएं:
ईमानदारी एक दुर्लभ गुण है। केवल सच बोलना ही ईमानदारी नहीं है बल्कि ईमानदारी का मतलब है हर कत्र्तव्य को जिम्मेदारी के साथ पूरा करना।
जोखि़म लेने से पीछें न हटें:
कई बार जिंदगी मे आगे बढ़ने के लिए जोखि़म भी उठाने पड़ते हैं। लेकिन यह बात हमेशा याद रखें – ब्ंसबनसंजमक त्पेा ले ठसपदक त्पेा न लें।
आदतों को अपना गुलाम बनाएं:
किसी भी कार्य की ‘सफलता’ और ‘असफलता’ के पीछे जिम्मेदार कारणों मंे अच्छी या बुरी आदतों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। कहा भी गया है-
श्ॅम उंाम ींइपजे ंदक ींइपजे उंाम नेश्ण्
आत्मविष्वास पर करें विष्वास:
मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है उसका आत्म विश्वास और जिसके पास इस ताकत का अभाव है, सही मायनों में दुनिया का सबसे दुर्बल व्यक्ति भी वही है।
‘कर्म ही धर्म’ का मन्त्र अपनाएं:
अपने कर्मों से अपना भाग्य बनाएं। लग्नशील और कर्मयोगी बनें। असफल होने पर भाग्य को कोसें नहीं। जरूरी है कि अपनी ताकत व क्षमताओं पर विश्वास रखें।
सीखने का दायरा बढ़ाएं:
प्रख्यात मोटिवेटर शिव खेड़ा के अनुसार, ज्यादातर लोग काबिलियत या अक्ल की कमी के कारण नाकामयाब नहीं होते बल्कि इरादा ;क्मेपतमद्धए रास्ता ;क्पतमबजपवदद्धए समर्पण ;क्मकपबंजपवदद्ध और अनुशासन ;क्पेबपचसपदमद्ध की कमी के कारण नाकामयाब होते हैं। ज्ञानवर्धक पुस्तकों को अपना साथी बनाएं। अच्छे लोगों से मेल-जोल बढ़ाएं। कामयाब लोगों से मिलकर उनसे प्रेरणा लें। माता-पिता एवं अध्यापकों द्वारा बताए मार्ग पर चलें।
गल्तियों से सबक सीखें:
जो व्यक्ति अपनी पिछली गल्तियों से सबक लेते हुए आगे बढ़ता है वही सच्ची सफलता हासिल करता है। इसके अलावा सोच-समझकर बोलें – हमेशा सकारात्मक कहें व सोचें।
सफलता का मूल मंत्र-सकारात्मक सोच:
यदि हम अपने सकारात्मक विचारों के साथ-साथ ईश्वर पर भी पूर्ण विश्वास करें तो हमंे किसी भी कार्य मंे सफलता मिलनी तय है। सकारात्मक सोच में एक उपचारात्मक शक्ति है। यह आशा और उत्साह की जनक है। जीवन एक परीक्षा है और सकारात्मक सोच के द्वारा ही उसमें सफलता प्राप्त होती है।
कला निर्णय लेने की:
‘‘गुरू ने अपना बनाकर मुझ को निर्णय लेना सीखा दिया।
अंधेरे दिमाग को रोशन करके मंजिल का रास्ता बता दिया।’’
गुरू रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा है कि, ‘‘जहां आप कुछ सीख सकते हो, वहीं झुक जाना चाहिए और जहां शान्ति मिले वहीं रूक जाना चाहिए।’’ अपने ऊपर कभी भी अहंकार न करें। विनम्रता, सफल जीवन का सबसे बड़ा गुण है। सबसे बढ़कर स्वाभिमानी बनेें।
सपनों को देखें तथा खुष रहें:
ऐसा कहा जाता है कि जो लोग सिर्फ सपने देखना जानते हैं, उनको रातें छोटी लगती हैं और जो सपनों को साकार करना चाहते हैं उन्हें दिन छोटे लगते हैं।
मत भूला, श्। कतमंउ पे दवज ूींज लवन ेमम पद लवनत ेसममचए इनज वदम जींज कवमे दवज समज लवन ेसममचण्श् सपनों के बारे मंे तो यहां तक कहा गया है कि, श्ॅपजीवनज कतमंउ ं उंद पे ं कमंक उंदण्श्
धर्म के प्रति आस्था रखें क्योंकि सभी धर्म एकता और भाईचारे का उपदेश देते हैं। इसके अलावा ईश्वर पर विश्वास रखें कि वह हमारी मदद कर रहा है। आस्था, समझ और समर्पण निराशा को हटाते हैं। कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।
कहा भी गया है:-
‘‘चलते नहीं मील के पत्थर उनका काम बताना दूरी,
राह स्वयं ही चलनी होगी चाह तभी होती है पूरी।’’
और यह भी याद रखें:-
‘‘ये धरती एक उत्सव है, मनाकर तो देखो।
धरती का कण-कण उर्वर है तुम फूल खिलाकर तो देखो।’’

 

 

अनुज कुमार आचार्य

 

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