Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

आज का जश्न

 

आज का जश्न

सोचे तनिक ठहरकर करे विचार,

सुखी जीवन का क्या हो उपाय ?

आलोचना नहीं बिल्कुल नहीं,

आलोचना से कहाँ  सुख मिलता,

कहाँ कुछ होता सही-सही 

आलोचना नहीं, ख़ुद को स्वीकारें जैसे हैं आप 

सकारात्मक बदलाव, ख़ुद को प्यार,

अपनी जहां वालों कर करें माफ़ l 

बूढ़े हो रहे नहीं, दिव्य जीवन पथ पर बढ़ रहे हैं 

औरों को किया माफ ख़ुद को करो आप 

जीवन अनमोल,जश्न मनाएं 

डर जीने का बुरा तरीका दूर जाएं 

सुखद विचार सिंयें, हंसी-खुशी जीवन जीये l 

बूढ़ा हो रहा नहीं, बिल्कुल नहीं 

ख़ुद के प्रति सौम्य और धैर्यवान बने 

सच जैसा ख़ुद से करते प्रेम 

वैसा दूसरों से करें 

सौम्य, दयालु, धैर्यवान रहें l 

घृणा नहीं, दया समता, शीलता,

जीओ और जीने पर दें ध्यान 

स्वयं की प्रशंसा, बचपन की खुशियाँ 

जीवन का आनंद उठाएं 

वर्तमान में जीये, योग व्यायाम करें 

बूढ़ा नहीं नहीं मन से मौज करें 

जीवन फूल कर्म सुगंध विश्वास करें l 

धनवान होने, स्वस्थ होने, 

नये दोस्त बनाने का इंतजार नहीं अब 

वर्तमान में जो है, उसी  में मौज करें 

प्यार बाँटे प्यारे ख़ुद से प्यार करें 

जीवन का सुख अलौकिक पाएं 

सुख-शांति का जीवन जीये

जेब में दर्पण रखे,

निहारे मुस्कराता चेहरा अलौकिक 

दुनिया का खूबसूरत चेहरा देखें 

तारीफ करें, मन से मुस्कराएं 

जीवन का हर पल अनमोल बसंत 

बसंत की सोंधी सुगंध एहसास पाएं 

सोचे...करें विचार आज का जश्न मनाएं l 

नन्दलाल भारती






Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ