Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मैं एक गांव

 
 मैं एक गांव
मैं एक गाँव हूँ,दुनिया के गावों की तरह 
मुझसे बाद में दुनिया में आया है शहर 
मैं भी प्रदूषण मुक्त नहीं रहा, शहर की तरह 
गांव के पोखर तालाब तब्दील होने लगे हैं 
गंदे नालों की शक्ल में, शहर की तरह 
दर्द नहीं जाता सहा, मेरी पवित्रता वो नहीं रही 
प्रदूषण मुक्त, पुरानी कहावतों जैसी 
सूरज अब नाराज होने लगा  है 
बादल रुठे-रुठे रहने लगे  हैं 
पोखरी तालाब प्रदूषण  की चपेट में आ चुके हैं 
नदियों की तरह  मरने लगे हैं पोखर-तालाब 
कुएं तो मर चुके हैं पहले ही गांवो में भी 
मैं गांव, मैं भी मर ना जाऊं एक दिन 
मुझे बचा लो, गांव को बचा लो  
गांव वाले तो छोड़ रहे हैं 
पोखर-तालाब में गांव की गंदगी 
कर रहे गटर खाली शहर की तरह 
ग़र रहा ऐसा? 
गांव को महामारियां कर देंगी खाली 
गांव की रह जाएगी बस कहानी  
ये पोखर तालाब मर जाएंगे 
क्या मैं जी पाऊंगा ?
मैं गांव ? प्रदूषण का शिकार 
गांव की गंदगी थामे मर ना जाऊं 
नक्शे से मिट ना जाऊं 
गांव-गांव के पोखर-तालाब जोड़ने की 
शुरुआत कर दो....गांव के सोंधेपन को बचा लो 
मुझे बचा लो..... गांव बचा लो l
नन्दलाल भारती
30/12/2025

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