Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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तुम बुरा मान गये

 


हमने हरजाई क्या कहा,तुम बुरा मान गये

चलो  अच्छा  हुआ, खुदी को पहचान गये


तुम्हारी  लड़ाई  रकीबों1 से थी, तुम जाते—

जाते , क्यों  बीच   में  मुझे  सान  गये


बार-बार  अपने  शिकवे की  बात न करो

तुम्हारी  बातों  में  है आग दबी,जान गये


आखिरकार पता चल ही गया,साहिबे-खाना2

तुमसे रूठकर रहने क्यों कबरिस्तान  गये


बहुत ढूँढ़ा, कोई तो मिले जो हमको समझे

मगर,ढूँढ़कर भी न कोई ऐसे इन्सान मिले



  1. प्रतिद्वन्दियों  2.घर का मालिक


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