ईश्वर
तुम कुरूप , तुम सुंदर
तुम सूक्ष्म , तुम समंदर
तुम बंधन मुक्त , तुम
सभी रूपों में एक रूप
हममें तुममें इतना अंतर
तुम अमर , हम नश्वर
तुम मौन, नाश, विध्वंश , अंधेरा
तुम प्रलय ,निशा का सुंदर सबेरा
तुम जड़ , तुम चेतन
तुम नित नूतनता का आनंद
तुम अमृत , तुम जहर
तुम शांत , तुम कहर
दुःख बिजली बन उतरते जब
धरा पर अणु-अणु जाता सिहर
तुम बहार , तुम पतझड़
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