Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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ईश्वर

 

ईश्वर

 


तुम   कुरूप ,  तुम   सुंदर

तुम   सूक्ष्म , तुम    समंदर

तुम   बंधन   मुक्त ,    तुम

सभी  रूपों   में  एक  रूप

हममें तुममें   इतना  अंतर

तुम  अमर ,   हम     नश्वर


तुम  मौन,  नाश, विध्वंश , अंधेरा

तुम प्रलय ,निशा का सुंदर सबेरा

तुम      जड़  ,     तुम     चेतन

तुम   नित   नूतनता  का  आनंद


तुम      अमृत ,    तुम      जहर

तुम      शांत   ,   तुम      कहर

दुःख  बिजली  बन  उतरते  जब

धरा  पर अणु-अणु  जाता सिहर

तुम     बहार  ,  तुम     पतझड़

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