Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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बस उन्हें देख रहा हूं दुनियां भुला के

 
बस उन्हें देख रहा हूं दुनियां भुला के

बस उन्हें देख रहा हूं दुनियां भुला के
जो बैठे हैं मेरे ही पास नजरें झुका के ।

एक पल में ही तोड़ी मेरी सारी कसमें
निगाह अपनी मेरी निगाह से मिला के ।

मेरे इंतजार को लंबी उम्र अता कर के
उसे जाने क्या मिलता है मुझे यूं सता के ।

इश्क में दोहमते अब सब मेरे नाम पर हैं
वो तो निकल गए अपना दामन बचा के ।

ये जिंदगी इतनी बेरहम है कि मत पूछो
जाने कहां चली जाती है दामन छुड़ा के ।

जिनसे मांगी थी मोहब्बत की दुआ मैंने
वही छोड़ गए हैं पीठ में खंजर घुसा के ।

शाख से टूटा हूं तो अब कहां जाऊंगा ?
जहां चाहे वहां ले जाए ये हवा बहा के ।




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