Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मेरी तकदीर हो तुम

 

हवाओं फिजाओं द्घटाओं
की एक तस्वीर हो तुम
संभालो बचा लो छुपा लो
कि मेरी तकदीर हो तुम
मेरी तकदीर हो तुम-४
उस जन्नत से आई मेरी ताबीर हो तुम
खुशियां दे रही हो
गम हर ले रही हो
ओ खुशियां दे रही हो
गम हर ले रही हो
मोहब्बत चाहत नजाकत
कि एक तासीर हो तुम
मेरी तकदीर हो तुम-४
उस जन्नत से आई मेरी ताबीर हो तुम

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