आधीन परंपरा में घुटती
स्वाधीन विचारों की पारिभाषा,
आधार की कठपुतली बन,
स्वधारी आत्म को निराशा,
परम प्रश्न की पगडंडी पर,
निरुत्तर मेरी हर जिज्ञासा,
बोझिल सांसारिक चेतना और
धूँधली पड़ती परमात्म की अभिलाषा,
सत्य की राह से ही दूर करता,
यह आडंबरी भिक्षुक मायावी तमाशा।
Neha Atri
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