Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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उस दिन

 
उस दिन 
बहुत दुःख हुआ था 
अचानक 
खिड़कियाँ खुल गयी थी 
तूफानी हवा के ज़ोर से  
और 
मेरी संवेदनशीलता को 
तितर बितर कर गयी थी 
आज 
तुम्हारे आने से 
सोचता हूँ 
मेरा हाथ बंटाकर तुम 
संवेदनशीलता को 
इकठ्ठी करने में लग गई हो
प्यारा सा गुलदस्ता 
मेरी संवेदनाओं का
और तुम्हारी मुस्कुराहट
इंसान बनना चाहता हूँ 
*
पंकज त्रिवेदी 
7 May 2018

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