न हिन्दू बन , न मुसल्मा बन । कर कोशिश तू इंसान बन ।।
तू मनु है , तू मानव बन । तू मानवता की मिसाल बन ।।
न मुल्ला बन, न पंडित बन । तू रहम कर के रहमान बन ।।
तू राम बन, तू रहीम बन । तू विवेकानंद की हुनकार बन ।।
न हिन्दू बन , न मुसल्मा बन । कर कोशिश तू इंसान बन ।।
तू गीता बन, तू कुरान बन । तू गुरु ग्रंथ की पहचान बन ।|
तू डॉक्टर बनके मसीहा बन । उदास आँखों से पोंछ शबनम ।।
तू मनु है , तू मानव बन । तू मानवता की मिसाल बन ।।
न तोप बन , न तलवार बन । न परमाणु बम, न एटम बम ।
बनना है तो गुलदस्ता बन । बांटे खुशियाँ कम करदे गम ।।
न हिन्दू बन , न मुसल्मा बन । कर कोशिश तू इंसान बन ।।
तू चीन बन , न जापान बन । इराक बन न ईरान बन ।।
न पूरब बन , न पश्चिम बन । उत्तर बन न दक्षिण बन ।।
सारा जग तेरा है तू इसमें रम । कर कोशिश तू इंसान बन ।।
तू आशीष बन, तू मनीष बन । तू निशा बन, तू विवेक बन ।।
तू अर्चना की ज्योति बन । तू चंद्र प्रकाश की बन सरगम ।।
तू मनु है , तू मानव बन । तू मानवता की मिसाल बन ।।
Prashant Gupta
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