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माँ और बिटियाँ

 
माँ और बिटियाँ

माँ से बिटियाँ का
स्नेह होता है लाजवाब
बिटियाँ को सुलाती अपने आँचल में
लगता है जैसे फूलों के मध्य
पराग हो झोली में।

माँ की आवाज कोयल सी
और बिटिया की खिलखिलाहट
पायल की छुन -छुन सी
लगता है जैसे मधुर संगीत हो फिजाओं में ।

माँ तो ममता की की अविरल बहती नदी
बिटियाँ हो जैसे कल कल सी आवाज
निर्मल पावन जल की
लगता है जैसे पूजते रहे सदियों से इन्हे ।

माँ होती चांदनी सी
बिटिया हो सूरज की पहली किरण
दोनों देती है रौशनी
अपने-अपने पथ कर्तव्य की
लगता हो जैसे भ्रूण - हत्या का अंधकार हटा रही हो।

माँ और बेटियाँ से
जन्म लेते है कई रिश्ते
ये होती है समाज का आधार
दोनों के बिना होता है जीवन सूना
लगता है जैसे इनमे बसती जीवन की सांसे।

संजय वर्मा 'दृष्टि '
125, बलिदानी भगत सिंह मार्ग
मनावर जिला-धार (म प्र )

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