Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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शिकायत भवन

 
शिकायत भवन

नगर में नई कॉलोनी बनी | मित्र ने प्लॉट लिया और मकान बनाना शुरू कर दिया | दोस्त शम्भु, रावत ,राकेश वहाँ जाकर निरीक्षण करते कितना बना और कब तक काम पूरा होगा | उन्हें इस बात की जल्दी है की पार्टी मिलेगी | एक दिन जब मकान देखने गए तो उन्होंने देखा की एक आवारा कुत्ता नए मकान की गीली छत पर टहल रहा उसके पंजे के निशान जगह -जगह बने गए थे | दोस्तों ने अपने मकान मालिक मित्र को सारी स्थिति बताई | वो चिंता में पड़ गया अब इसका इलाज करना होगा | पहले से ही मकान की क़िस्त चल रही है उसकी चिंता और अब छत पर रोजाना चढ़ने वाले कुत्ते को भगाने की फ़िक्र| इधर गाँव में कुत्ते पकड़ने की गाड़ी घूम रही थी | बस फिर क्या किसी ने कहा नई कॉलोनी में छत पर चढ़े कुत्ते को पकड़ना है | कुत्ते पकड़ने वाले आये और वे भी गीली छत पर चढ़ गए अब पहले कुत्ते के पंजे के निशान थे अब इंसान के चारों और निशान छप गए | कुत्ते को पकड़ कर ले गए | शाम को ये दोस्त मकान का अब कितना काम हुआ ये देखने छत पर चढ़े उन्होंने दोस्त को कहा- यार छत पर क्या गजब  डिजाइन बनवाई है बड़ी सुन्दर लग रही है | ऐसी डिजाइन बड़ी आधुनिक है | उन्हें तो कैसे भी उसकी छत की तारीफ करना ही थी | यदि ना करें तो पार्टी और दूर चली जाएगी |जब मकान पूर्ण रूप से बन गया तब दोस्त ने अपने रिश्तेदार,मित्र लोगों को खाने पर बुलाया | उधर जंगल में छोड़ा कुत्ता वापस मकान उदघाटन के दिन संयोग से आ धमका | कुत्ता उन लोगों पर ज्यादा गुर्रा रहा था जिनकी वजह से उसे पकड़ कर जंगल में छोड़ा गया था |उसे भी मालुम था की यहां पहली रोटी गाय और आखरी रोटी कुत्ते की रखी जाती ही है| सभी दोस्त कुत्ते डर से खाना सही ढंग से नहीं खा पा रहे थे | कुत्ते की शिकायत का भय दोस्तों के मन में समाया जो था | बाहर आकर देखा की घर के सामने इतनी भीड़ क्यों लगी है | सभी दोस्त वहां जाकर देखा तो मालुम हुआ की कोई गाडी वाला इस बेचारे कुत्ते पर गाड़ी से टक्कर मार के चला गया| कुत्ते ने आखरी बार इन शिकायत करने वाले लोगो की और आस भरी निगाह से देख कर आँखे मूंद ली।अब दोस्तो ने अज्ञात वाहन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।वाहन चालक सीसीटीवी कैमरे द्वारा पकड़ा गया। मकान वाले ने अपने दोस्तों को होटल में पार्टी अलग से दी।
होटल वाले ने बिल ज्यादा ही बना दिया।उस पर दोस्तों ने हल्ला मचाकर फिर होटल मालिक शिकायत दर्ज करवाई।कुछ दिनों बाद मामला रफा दफा हुआ।
दोस्त को ऐसे लगने लगा कि मेरे दोस्तो की तो ये रोज की आदत बन गई है।इनकी आदत को कैसे सुधारा जाए।जबकि ये दोस्त सही बात के लिए शिकायत दर्ज करवाते थे।वे कहते जमाना सीधेपन का नही है। 
दोस्त ने दोस्तो के घर जाकर उनके माता -पिता से उनकी आदत की शिकायत की।दोस्त जब घर गए तो घर पर समझाइश की डाट पड़ी। दोस्त का दिमाग घूम गया उसने अपने नए मकान का नाम ही शिकायत भवन लिखवा दिया। अब कॉलोनी के लोग उसके घर जाकर पूछने आने लगे की आपने ये अजीब नाम शिकायत भवन क्यों रखा।दोस्त उन्हें शिकायत भरी कहानी कैसे सुनाता।दोस्त ने कहा मेरा उपनाम शिकायत था इसलिये मैने शिकायत भवन  रख दिया।फिर भी लोगों के मन में अजीब अमर सवाल अब भी उठ रहे थे।जिनका हल उन्हें अब तक नहीं मिला ।
संजय वर्मा"दृष्टि"
मनावर जिला धार मप्र

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