Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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सरयू

 
सरयू
सरयू संवारें ली
पुरखन के तारेंलीं। 
सुबह शाम देनीं जीवनदान
हे मां सरयू तुझे प्रणाम। 

हिमालय की गोंद से निकलकर
पड़ा शारदा नाम। 
अयोध्या की लहरों से निकला
जय श्री राम सीता राम। 

करनाली चीनी भाई कहते
नेपाल में पड़ा है काली नाम। 
तुम पुरखों को उतरती माता
हे मां सरयू तुझे प्रणाम। 

अंग्रेजों ने घागरा नाम  दिया
तेरी लहरों में हरिहर नाम। 
सदियों से सरजू मां हो तुम
माता सरजू तुझे प्रणाम। 

तेरी तलहटी में बहुरंगी फैसले
मानव को तृप्त करती हो मां। 
लहरी कल कल करती बढ़ती
हे मां सरयू तुझे प्रणाम। 

तेरे तट पर साधु संत सब
शाम सुबह तुझे करते प्रणाम। 
चारों तरफ एक ही धुन
अयोध्या में जय श्री राम। 

राम धाम हो देवि का  बहती
चंडी को करने चली प्रणाम। 
तेरे तेरे चांदीपुर धाम
हे मां शारदे तुझे प्रणाम।
 
धन्य हुआ मंगल सरयू से
सत सत माता तुझे प्रणाम।
जब तक धरा पर मां तू होगी
मंगल हो माँ चारों धाम। 
- सुख मंगल सिंह





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