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Dr. Srimati Tara Singh
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शास्त्र साहित्य का प्रभाव

 

शास्त्र साहित्य का प्रभाव


प्रति क्षण मंगल जय जय बोलो
किसी मनुष का भेद ना खोलो। 
घर की बातें जो घर में ही बोलो
कपटी से तुम दूरी खुद कर लो। 

बड़ा छोटा कह बद जुबां न बोलो
जीवन शैली में मधुरास घोलओ। 
आरनयक जीवन  को सही मनो
जीवन शैली क गाथा जीवंत जानो। 

छात्र अध्यापक का धनयवाद करना जाने
शिक्षा क्षेत्र में पुरा जीवन समर्पित मानें। 
शिक्षक दिवस छात्र मनाए गुरु वे जानें
शिक्षक पर्व विद्यालय में मनाया जाए ठाने। 

भारत में विज्ञान प्राउद्योगिक मैं कदम बढ़ाया
देश की मुखिया का इनमें समर्थन पाया। 
भारत की जैव अर्थव्यवस्था में उछाल आया
300 अरब डॉलर पहुंचाने का अनुमान जताया। 

जैव प्राउद्योगिकी क्रांति लाएगी भारत में
हमने गहन महासागर अभियान चलाया। 
कोलकाता में पानी भीतर मेट्रोलाइन बनाया
क्रेन और जेसीबी मशीन चलती दिखलाया। 

भारत में छोटे कारोबारियों के भाग्य उदय हुऎ
बैंकों से बिचौलियों बिना सीधा ऋण प्राप्त किए। 
प्रदूषण नियंत्रण में स्वाछ भारत अभियां चलाया
फसल बीमा धारकों ने पुरा पुरा लाभ उठाया। 

जन जीवन में उत्सुकता आनंद शांति अपनाओ
खर दूषण राक्षह इस अवनि पर ना पनपने पाये। 
भावुकता को गहराई से टटोलने पर आनंद मिलता
शास्त्र साहित्य का प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी फड़ता। । 
- सुख मंगल सिंह



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