Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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लिखना पढ़ना बंद है, दिनभर लेता मैं हूँ नींद

 

लिखना पढ़ना बंद है, दिनभर लेता मैं हूँ नींद,
शायद सपने में हो जाये, मेरे पिय की दीद !!

 

 

मेरे पिय की दीद, रहूँ मैं हरदम सोता सोता,
दद्दा कहते हो गया निठल्ला समय को खोता !

 

 

कहे "साँझ" अब, दद्दा को क्या सपना आये,
जब जब आँख लगी, मेरी दादी इन्हें जगाये !!

 

 

सुनील मिश्रा "साँझ"

 

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