एक किसान के पास एक घर था,एक खेत था और उसके चार बेटे थे। किसान ने अपनी वसीयत में अपने पहले बेटे के नाम लिखा एक-चौथाई घर और एक-चौथाई खेत या पूरा घर,पूरा खेत और तीन भाई।
दूसरे के हिस्से में भी यही लिखा।
तीसरे और चौथे के हिस्से में भी यही लिखा।
पिता की मृत्यु के बाद वसीयत पढ़ी गई।
चारों ने दूसरा विकल्प चुना।
फिर धीरे-धीरे एक-एक कर चारों की शादियाँ हो गईं और चारों को उच्च शिक्षित पत्नियाँ मिल गईं।
पत्नियों का कहना है कि क्यों न पहले विकल्प पर भी विचार कर लिया जाए।
आगे की कथा अभी भविष्य के गर्भ में है।
ठाकुर दास 'सिद्ध',
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