Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मनहरण हास्य घनाक्षरी

 

 

मंदिर के भीतर जो झाँका एक पादरी ने,
संत जी ने पूछा आप कौन हैं क्या काम है?
बाप हूँ तुम्हारा मैं तो फादर है नाम मेरा,
गॉड का ही दूत मानो बोलो भी क्या नाम है?
रामजी का सेवक हूँ पूजा करना है काम,
रामनाम जपता हूँ नहीं ताम-झाम है.
बाप का भी बाप बोलते हैं मुझे लोग बाबा,
ग्रैंड पा पुकार के कहो जी राम-राम है..

 

 

 

--इं० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

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